Ceramic Engineering (सेरेमिक इंजीनियरिंग क्या हैं)

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सेरेमिक इंजीनियरिंग में बढ़ता करियर का दायरा
पुराने जमाने में कच्ची मिटटी के बर्तन इस्तेमाल होते थे। पर आज यही एक नयें रूप में विकसित हुए है से​रेमिक बर्तन।
चिकनी मिटटी के बर्तनों पर ग्लेजिंग की परत चढ़ानेे से शुरू हुई परम्परा वर्तमान मे सिलिका और जिरकोनियम जैसी अधातुओं के अत्याधुनिक उपयोग तक आ पहुंचा है। सुबह की चाय की प्याली के साथ ही शुरू हो जाता है सेरेमिक के साथ सफर हमारा।

आज सेरेमिक वस्तुएं हमारी चाय—कॉफी की प्याली से बहुत आगे बढ़कर आॅटोमोबाइल और स्पेस से लेकर मेडिकल क्षेत्र तक में छा गई हैं। गौरतलब है कि सेरेमिक उत्पादों को परिभाषित करने के अनेक तरीके हो सकते हैं, लेकिन सबसे बेहतर परिभाषा यह है कि ऐसा कोई भी उत्पाद ​जिसकी एक निश्चित आकृति हो, जो एक असंबद्ध पाउडर के रूप में नॉन मैटेलिक तथा इनआॅर्गेनिक मैटीरियल से बना हो, जिसे विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा एक सेमी फिनिश्ड आइटम के रूप में परिवर्तित किया जाए, फिर आग में तपाने यानी हीट ट्रीटमेंट से यह एक सॉलिड आइटम बन जाता है, जो आशिक ​क्रिस्टलाइन तथा आंशिक विटरस स्ट्रक्चर होता है। इसे ही हम सेरेमिक उत्पाद कहते हैं। सेरेमिक पदार्थ से अत्याधुनिक उपयोग की वस्तुएॅं बनाने की तकनीक ही सेरेमिक इंजीनियरिंग के नाम से जानी जाती है। सेरेमिक इंजीनियरिंग इनआॅर्गेनिक, नॉनमैटेलिक मटीरियल्स से सेरेमिक सामान बनाने का विज्ञान और तकनीक है।

वर्तमान समस में सेरेमिक इंजीनियरिंग के तहत औद्योगिक इस्तेमाल के लिए बहुत तेजी से नए—नए सेरेमिक मटेरियल्स का विकास किया जा रहा है। किचन वेयर, कान्क्रीट तथा टाइल्स जैसे ट्रेडिशनल सेरेमिक उपयोग अब बहुत पुराने पड़ चुके हैं। सेरेमिक सामान का इस्तेमाल अब स्पेसक्राफट में हीट र​जिस्टेंट के रूप में भी होने लगा है। सेरेमिक मैटीरियल का यही विशेष स्वरूप इलेक्ट्रिकल्स, कैमिकल तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में कई तरह की एप्लीकेशंस को बढ़ावा दे रहा है। सेरेमिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजिकल एप्लीकेशन के लिए सेरेमिक्स के कंपोनेंट, डिवाइस, मशीनों की प्रोसेसिंग, फेब्रिकेशन तथा विभिन्न तरह के ग्लास आदि से जुड़ी है।

इस क्रांति के दौर में गोल्फ के मैदान से लेकर मिसाइलों तक में सेरेमिक वस्तुओं का उपयोग हो रहा है। फाइबर आॅप्टिक्स, बायोसेरेमिक्स और इंटीग्रेटेड इलेकट्रॉनिक्स आज के दौर में सेरेमिक इंडस्ट्री का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। वर्तमान में सेरेमिक इंजीनियर का काम उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक की सहायता से असाधारण मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक और आॅप्टिकल क्षमताओं से भरपूर मेटीरियल्स डेवलप करना है। गौरतलब है कि सेरेमिक इंजीनियर बनने के लिए बेहतर डिजाइनर और कल्पनाशील होना नितांत आवश्यक है। कार्य का समय तय रहता हैं और आप बेहतर सोशल लाइफ जी सकते हैं। सेरेमिक इंजीनियर का काम दिन—प्रतिदिन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, क्योंकि लोग इनोवेटिव प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सॉल्यूशन डिजाइन की मांग करने लगे हैं।

सेरेमिक इंजीनियर के रूप में आप निम्न काम कर सकते हैं—
स्पेस शटल के लिए इम्प्रूव्ड हीट टाइल्स का विकास जो भविष्य की तकनीक से निर्मित यानों को धरती के वातावरण से घर्षण के कारण उत्पन्न गर्मी से बचा सके।
और दूसरा—
सेरेमिक के दांत, हड्डियॉं और जोड़ों आदि कृत्रिम अंगों का विकास।
सेरेमिक सुपर कंडक्टर और आॅप्टिकल फाइबर की मदद से अल्ट्रा फास्ट कम्प्यूटर का विकास।

सेरेमिक इंजीनियरिंग की बी. टेक, डिग्री के लिए फिजिक्स, केमेंस्ट्री और मैथ्स विष्यों के साथ बारहवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। पाठयक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण करनी होती है। बी.टेक. के बाद गेट की परीक्षा देकर इस क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया जा सकता है। सेरेमिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उज्जवल भविष्य बनाने के लिए उम्मीदवार की बेसिक सांइस मे अच्छी पकड़ होनी चाहिए, और वह इनोवेटिव हो, उसमें विश्लेषणात्मक दक्षता हो, खुद बेहतर करने की इच्छाशक्ति हो, उसमें टीम को साथ लेकर चलने की योग्यता हो, समस्या को सुलझाने वाला व्यक्तित्व हो, उसमें परस्पर वार्तालाप करने की दक्षता हो तथा बेहतर प्रोडक्ट डिजाइनिंग तथा उसमें बाजार की मांग को समझ करने की क्षमता हो।

अत्याधुनिक शहरी विनिर्माण के लिए इम्प्रूवड मटेरियल का विज्ञान और तकनीक के विकास के साथ—साथ इस क्षेत्र का भी बहुत तेजी से विकास हुआ है। इस विकास ने खास क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन की जरूरत भी पैदा कर दी है। सेरेमिक पाउडर के विकास, फेरोइलेक्ट्रिक और डाईइलेक्ट्रिक क्षमताओं का विकास, सौर सेल, नैनोसट्रक्चर, तापरोधी मटेरियल्स का विकास आदि कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं। सेरेमिक मेटल सिस्टम, कम्पोजिट और सर्जरी की जरूरतों के लिए फाइबर आॅप्टिक मटेरियल के क्षेत्र में विशेषज्ञता होनी आवश्यक है। रूचियों के अनुसार किसी भी तकनीक मे विशेषज्ञता आपके करियर में चार चॉंद लगा सकती हैं वर्तमान समय में भारत में सेरेमिक इंडस्ट्री 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है। सेरेमिक इंडस्ट्री के विकास के लिए कई तरह के सुधारों के लिए कदम उठाए जा रहे हैंं इसके चलते इस क्षेत्र में भविष्य काफी सुनहरा दिखाई दे रहा हैं सेरेमिक इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री करके आप रिसर्च तथा टीचिंग के क्षेत्र में भी सुनहरा करियर बना सकते हैं। सेरेमिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में युवाओं को रोजगार के लिए बहुत अच्छी संभावनाएॅं हैं। कई बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में सेरेमिक इंजीनियरों की सेवाएं लेती हैं। पारम्परिक क्षेत्रों से लेकर अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में सेरेमिक इंजीनियरों की भारी मांग हैं।

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