नवरात्र के दौरान होने वाली पूजा का महत्व !

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दुर्गा, चंडी, चंड—मुंड विनाशिनी, भैरवी, भगवती, मां भवानी आदि अनेकों नामों से पूजी जाती है मा दुर्गा। दुर्गा मां दुर्गति परिहारिणी हैं। वे नकारात्मकता को सकारात्मकता में परिवर्तित करती है। यहाँ तक कि कठिनाइयों को भी उनके पास आने में बहुत कठिनाई होती है!

दुर्गा की उपस्थिति में
हम सब एक अदृश्य जगमगाती ब्रह्माण्डीय शक्ति की ओज में तैर रहे हैं। जिसे आदिशक्ति या देवी कहा गया है। आदिशक्ति इस संपूर्ण दृष्टि का गर्भ स्थान है, वह गतिशीलता, ओज, सुंदरता, धैर्य, शांति और पोषण क़ा बीज है। वह जीवन की ऊर्जा शक्ति है। दुर्गा या चंडी को सदा ही आदिशक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। जो सभी बुराइयों से हमको बचाती हैं। दुर्गा का एक अर्थ पहाड़ी होता है जिसे बहुत कठिन कार्य के लिए प्राय: दुर्गम कार्य कहा गया है। दुर्गा की उपस्थिति में नकारात्मक तत्व कमज़ोर पड़ते हैं। दुर्गा को जयदुर्गा भी कहते हैं जो विजेता बनाती है। वह जो विघ्नों को हरण कर लेती हैं वे नकारात्मकता को सकारात्मकता में परिवर्तित करती हैं। यहाँ तक की कठिनाइयों को भी उनके पास आने में बहुत कठनाई होती है।

वह सभी गुणों का पोषण करती हैं
जब देवी माँ को हम दुर्गा या आदिशक्ति के रूप में पूजते करते हैं, तब हम अपनेआप को साहसी, विजयी और करुणामय पाते हैं। यह दिव्यता का कितना सुंदर रूप है, जो आपको माँ के साथ जोड़ता है। वह सभी गुणों का पोषण करती हैं, आदिशक्ति की भक्ति सकारात्मकता को बढ़ावा देती है। यह एक तरह से सौभाग्य को संग्रह करने जैसा है। उदाहरण के लिए जब आप अपनी माता के पास होते हैं, तो सब कुछ अच्छा ही होता है। हम मेधावी हो जाते हैं। और सौभाग्य प्राप्त करके उसे बनाए रखने में समर्थ हो जाते हैं। जीवन अनेक बार आपको साहस, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करता है। लेकिन उसे बनाए रखने और उसे खुशी और करुणा में परिवर्तित करने की क्षमता में कमी रहती है। नवरात्र दुर्गा/आदिशक्ति की पूजा का विशेष अवसर है। ताकि जीवन में ये सब गुण एक साथ पनपें और बढ़ें, और सामंजस्य के साथ—साथ एकता बनी रहे।

आध्यात्मिक विकास
के लिए अगर हम हमेशा विजयी रहे परन्तु हम्हें खुशी न मिल पाये तब उसका कोई प्रयोजन नहीं बनता। इसी तरह अगर हम हमेशा प्रयास करते आए हो फिर भी सफलता नहीं मिले, तब भी यह बड़ा निराशाजनक होता है। दुर्गा शक्ति हमें सब कुछ एक साथ प्रदान करती है, व सभी गुण एक इकाई के रूप में आपके लिए उपलब्ध हैं हम अपनी चेतना में इन सभी गुणों को जगाकर स्वस्थ शरीर पदार्थ इच्छाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक विकास के लिए आदिशक्ति से प्रार्थना करते हैं।

लाल रंग

माँ दुर्गा को लाल रंग से जोड़ा गया है। उनके रूप में लाल साड़ी पहने हुए दर्शाया गया है। लाल रंग गतिशीलता का प्रतीक है एक दैदीप्यमान मनोभाव, एक स्फूर्त ऊर्जा है। आप प्रशिक्षित और कुशल हो सकते हैं। लेकिन अगर आप अपने प्रयासों को, वस्तुओं को और लोगों को एक साथ लेते हुए चलायमान करने में सक्षम नहीं है तो फल देरी से मिलता है। लेकिन जब आप दुर्गा से प्रार्थना करते हो तब आपके सारे काम स्वत: ही संभव हो जाते है।

क्योंकि ये मानव का स्वभाव है
मनुष्य की प्रार्थना हमेशा किसी इच्छा की पूर्ति से जुड़ी रहती है। जब आप पूर्ण होते हैं तब एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया बन जाती है। जब आप किसी एक कार्य में सफल हो जाते हैं तब आप अन्य सफलताओं के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसलिए यह आवश्यक नहीं है की आप संतुष्ट हो जाए क्योंकि ये मानव का स्वभाव है जो हमेशा गतिशीलता के लिए प्रार्थना करता है। लेकिन स्थिरता का भी अनुभव करकें देखें।

यह सृष्टि तीन गुणों से बनी है:

प्रकृति दिव्य माता है। यह सृष्टि तीन गुणों से बनी है: सत्व, रजस, और तमस।
सत्व— यह स्थिरता, मन की स्पष्टता, उत्साह और शांति से जुड़ा है।
रजस— यह कर्म के लिए आवश्यक है, लेकिन प्राय: ज्वर उत्पन्न करता है।
तमस— यह जड़ता है और इसके असंतुलन होने से आलस्य, सुस्ती और अवसाद आता हैं,
जब आप तमस को ठीक से संभाल लेते है, तब आप सत्व की ओर बढ़ने लगते है। इस रचना का हर जीव तीन गुणों की कठपुतली है। इस चक्र से बाहर कैसे निकला जाए और इसकी सीमा से बाहर कैसे आया जाए। चलिए जानते हैं।

परमात्मा को जनना !!!
तो उसके लिए आपको अपना सत्व बढ़ाना होगा। जैसे कि ध्यान, मौन और शुद्ध भोजन, क्योंकि इनकी सहायता से आप इन चक्रों से बाहर निकल सकते हो। इन गुणों के परे निकलकर आप विश्व तत्व में स्थित हो सकते हों, जो की विशुद्ध और अनंत चेतना है। प्रकृति विपरीत गुणों से परिपूर्ण है। जैसे दिन और रात, सर्दी और गर्मी, दर्द और आनंद, सुख और दुख इत्यादि।
विपरीत गुणों से ऊपर उठकर द्वैत से बाहर आकर आप एक बार फिर से तत्वों को प्राप्त कर सकते हैं यही नवरात्र के दौरान होने वाली पूजा का सबसे बड़ा और विशेष महत्व है। अप्रकट और अदृश्य ऊर्जा यानि (Cosmic Energy) का प्रकटीकरण उस देवी का जिनकी कृपा से आप गुणों से बाहर आ सकते हैं। और अपनी आत्मा को परमात्मा में विलीन कर सकते हैं।
जय माता दी !!!

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